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जमनालाल बजाज पुरुस्कार हेंवलघाटी के धूम सिंह नेगी जी को

- धूम सिंह नेगी -
कुसुम रावत, देहरादून।

कल रात पता चला कि मुम्बई में धूम सिंह नेगी जी को जमनालाल बजाज पुरुस्कार मिला देश के उपराष्ट्रपति महोदय वैंकया नायडू जी के हाथों. पुरुस्कार में 10 लाख का नकद ईनाम. सम्मान लेने भाई जी के साथ उनकी धर्मपत्नि और बेटा अरविन्द साथ थे. आज सुबह फ़ोन पर बात हुई. मन खुश हो गया. वो विनोबा जी के आश्रम पवनार में हैं.
आज मेरे पास आज शब्दों का नितांत टोटा है, दुनिया के प्रसिद्ध चिपको और बीज बचाओ आन्दोलन के इस खामोश हेंवलघाटी के विनम्र नायक सर्वोदयी धूम सिंह नेगी की मंथर यात्रा के बारे में कुछ लिखने को....आज तो मेरे शब्द भी शर्मा रहे हें विनम्रता की मिसाल धूम सिंह नेगी के सामने चुप खड़े होने को. आज शायद हेंवलघाटी के लोगों को दिवाली सा जश्न मनाने का मौका जमनालाल बजाज न्यास ने दिया- धूम सिंह जी को साल 2018 का प्रतिष्ठित जमनालाल बजाज पुरुस्कार देकर. मुझे लगता है कि इतिहास के ऐसे शांत नायकों को सम्नानित करके सम्मान भी सही मायने में सम्मानित होते हैं. खासतौर पर जब आज रोज ईनाम देने और दिलाने होड़ सी लगी है. ऐसे में इस सम्मान की अपनी एक गरिमा और कहानी है.
टिहरी की प्रसिद्ध हेंवलघाटी का ये नायक किसी परिचय का मोहताज़ नहीं पर ये इतने खामोश और पीछे से काम करने वाले हैं कि लोग इनके बारे में वो सब नहीं जानते जिसको इतिहास के पन्नों का हिस्सा होना है. ये वो व्यक्ति हैं जो सरकारी नौकरी छोड़कर सर्वोदयी बने-चिपको आन्दोलन की रीढ़ बने-बीज बचाओ का इतिहास बने-जन जागरण की मशाल बने. ये इतिहास की वो अनगढ़ा-अनकहा-अनपढ़ा किताब है, जिसने हेंवलघाटी में बाँकुरे आन्दोलनकारियों की फौज तैयार की. इन्होने सरकारी नौकरी छोड़कर जाजल में स्कूल के बच्चों को पढ़ने की जिम्मेदारी ली. ये विनोबा जी से प्रभावित होकर सर्वोदय आन्दोलन का हिस्सा बने. बहुत लम्बी कहानी है इनकी.
ये पहले बन्दे थे हेंवलघाटी में जो पेड़ों से चिपके थे. एक रात ये अकेले जंगल में रहे पेड़ों को बचाने को. रात को डर लगी तो विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ पढ़ा, पर मोर्चे पर डटे रहे. ये इतने विश्वशनीय और विनम्र हैं कि इनकी मिसाल सिर्फ ये ही हो सकते हैं. मेरी कलम में ताकत नहीं इनको शब्दों में ढालने की....ये दुनिया के मशहूर बीज बचाओ आन्दोलन की उस टोली के नायक हैं जिसने इस आन्दोलन को जन्म दिया. धूम सिंह नेगी-सुदेशा बहन-कुंवर प्रसून-विजय जड़धारी-दयाल सिंह जी की मशहूर टीम ने बीज बचाओ आन्दोलन को जन्म देकर दुनिया को परम्परागत खेती और जैविक खेती बाड़ी का नारा हरित क्रांति के दौर में देने का साहस किया था.
आंदोलनों के लिए मशहूर हेंवलघाटी के हर आन्दोलन के अग्रिम लाईन के इस नायक की टोपी में खनन विरोधी, महिला जागरण, कुरीतियों-कुप्रथाओं, लालटेन आन्दोलन, टिहरी बांध विरोधी आन्दोलन, शराब विरोधी आन्दोलन, भूदान आन्दोलन, शिक्षा जन जागरण, बीज बचाओ आन्दोलन, चिपको आन्दोलन जैसे क्या-क्या और कैसे-कैसे सुन्दर पंख नहीं लगे हैं?
मेरा सौभाग्य है कि मैंने और मेरे साथियों ने महिला समाख्या टिहरी में धूम सिंह नेगी-कुंवर प्रसून-विजय जड़धारी की प्रसिद्ध जोड़ी के साथ सालों परम्परागत और जैविक खेती के मुद्दों पर जमीनी काम लगभग 300 से ज्यादा गांवों में किया. हमारी जुझारू टीम ने बीज बचाओ की सुन्दर सोच को जमीन पर उतारा. हम लोग एक टीम के माफिक काम करते थे. उस दौरान धूम सिंह जी को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला. मेरी किस्मत है कि मैं भी उसी हेंवलघाटी की हूँ जिसने धूम सिंह नेगी और कुंवर प्रसून की विलक्षण जोड़ी दुनिया को दी. धूम सिंह जी को गत माह उत्तराखंड महासभा मुम्बई ने भी सम्मानित किया था.
उनके बारे में यही बोल सकती हूँ कि ऐसे खामोश और अति विनम्र लोग हेंवलघाटी ही नहीं पूरी मानवता की धरोहर होते हैं.....
एक बात और जोड़ना चाहती हूँ कि धूम सिंह जी जैसे हीरे को तराशने वाले हेंवलघाटी के ही नायक युगवाणी पत्रिका के संस्थापक आचार्य गोपेश्वर कोठियाल जी ने ही इस हीरे को पहचाना और पहचान कर तराशने का काम किया. आज आचार्य जी को भी मैं बहुत सम्मान के साथ याद कर रही हूँ. मैंने उनको भी बचपन में देखा है.....
हे विनम्र सर्वोदयी नायक आपको आपके तमाम खामोश योगदानों हेतु पूरी हेंवलघाटी और मेरी उस वक्त की महिला समाख्या टिहरी टीम का विनम्र नमस्कार और बहुत-बहुत बधाई!

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